सभी सिद्धपीठों में मां कुंजापुरी में मां का सबसे दयालु व करूणामय स्वरूप! जानिए आखिर क्या है वजह..
वाचस्पति रयाल।
नरेन्द्र नगर की पहाडियों में स्थित मां कुंजापुरी सभी सिद्धपीठों में मां का सबसे दयालु स्वरूप है, हिमालय की पहाडियों की गोद में स्थापित मां कुजापुरी भक्तों के बीच शक्तिपीठ और सिद्धपीठ दोनों के रूपों में भक्तों के बीच प्रसि़द्ध है, नरेन्द्रनगर शहर से 13 किमी दूर एवं समुद्रतल से 1664 मी0 ऊंचाई पर स्थित मां कुंजापुरी कई रहस्यमय पौराणिक कहानियों को अपने में समेटे हुई है, कुंजापुरी में पहाड़ी की चोंटी पर स्थित मंदिर तक पहुचने के लिए भक्तों को तीन सौ आठ कंक्रीट सीढ़ियों को चढ़कर पहुचना पड़ता है, लेकिन मां कि अपने भक्तों पर ऐसी कृपा रहती है कि प्रकृति की गोद में बसे मां के दरबार में पहुचते ही भक्तों की थकान छूमंतर हो जाती है।
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देखिए मां कुंजापुरी की महिमा पर स्पेशल विडिया रिर्पोट
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आदिकाल में आदिगुरू शंकराचार्य द्वारा स्थापित मां कुजापुरी मंदिर का 01 अक्टूबर 1979 से 25 फरवरी 1980 तक नवीकरण किया गया था मां कुंजापुरी मंदिर के गर्भ गृह मे आज भीं कोई प्रतिमा नहीं है बल्कि केवल एक गड्ढा है, कहा जाता है कि यह वही स्थान है जहां मां का कुंजा भाग गिरा था, यहीं पर मां की पूजाध् अर्चना की जाती है, जबकि देवी की एक छोटी सी प्रतिमा एक कोने में रखी रहती है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने जब भगवान शिव के कंधों में रखी माता सति की मृत देह को अपने सुर्दशन चक्र से विच्छेदन किया था तब इस स्थान पर मां का मध्य भाग यानी कुंजा गिरी थी जिस कारण मां कुंजापुरी सबसे दयालु सिद्धपीठ और शक्तिपीठ माना जाता है, केदारखण्ड में लिखा है कि मां सति को दोबारा पत्नि के रूप में पाने के लिए भगवान शिव में सभी शक्तिपीठ और सिद्धपीठों में हजारों वर्ष तपस्या की लेकिन मां ने दर्शन नहीं दिए ,लेकिन कुंजापुरी में मां ने भगवान शिव को मात्र ढाई दिन की तपस्या के बाद ही दर्शन दे दिए थे जिसके बाद उन्होने भगवान शिव को अपने पार्वती रूप में अवतरित होने का वचन दिया
मां कुजापुरी से एक बड़ा रहस्य यह भी जुड़ा है कि अन्य मंदिरों के भांति यहां कोई ब्राहमण नहीं बल्कि गढ़वाली भण्डारी ठाकुर पुजारी होते हैं, नवरात्र शुरू होते ही नरेन्द्रनगर बाजार के साथ ही मंदिर में भी मां कुंजापुरी पर्यटन विकास मेला लगता है, इस साल भी कृर्षि मंत्री सुबोध उनिया आन नगर पालिका अध्यक्ष राजेन्द्र विक्रम पंवार द्वारा भव्य तरीके से मां कुंजापुरी पर्यटन विकास मंला आयोजित करवाया जा रहा है, बताया जाता है कि वर्ष 1972 तक टिहरी के तत्कालीन डीएम सुरेंद्र सिंह पांगती निसंन्तान थे, उनकी मन्नत मां कुजांपुरी ने पूरी की और उन्हे ार्शीवाद रूप में पुत्र प्राप्ति हुई। तभी से यहा मेला शुरू करवाया गया था,, कुंजापुरी मां पर भारतीयं सेना, पुलिस और आम भक्तों के साथ ही विदेशी भक्तों की भी आस्था जुड़ी रहती है, मां के करूणामय और दयालु स्वरूप के कारण भक्त मानते हैं कि मां कुंजापुरी अपने भक्तों से बहुत जल्द प्रसन्न हो जाती है, यही कारण है कि मां के मंदिर में आम आदमी से लेकर खास लोग भी मन्नत मांगने पहुंचते हैं,
मां कुंजापुरी अल्प समय में ही अपने भक्तों पर कृपा बरसाने के लिए जानी जाती है, वर्ष 1972 से नरेन्द्रनगर में आयोजित हो रहा मां कंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेला भी मां की चमत्कारिक आर्शीवाद के बाद ही शुरू हुआ था, और आज भी माना जाता है कि मां कुंजापुरी के दरबार से भक्त नाउम्मीद नहीं लौटते।