तो पंचायत चुनाव में मतदाता के पास नही होगा नोटा का विकल्प!
महेश पंवार/देहरादून।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियाॅ पूर्ण हो चुकी हैं, कल प्रदेशभर में पहले चरण के लिए मतदान होना है, सभी बूथों पर पोलिंग पार्टीया भी पहुच चुकी हैं, लेकिन इस बार उन मतदाताओं के लिए थोड़ी निराशा जरूर है जो वोट तो करना चाहते थे लेकिन चुनाव मैदान में उतरे किसी प्रत्याशी को वोट नही देना चाहते हैं, मतलब ये है कि इस बार पंचायत चुनाव में नोटा (NOTA) का विकल्प मतदाताओं के पास नही होगा।
लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भले ही मतदाताओं के पास काबिल प्रत्याशी न मिलने पर नोटा (NOTA) का बटन दबाने का विकल्प रहता है, लेकिन इस बार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रत्याशीयों के पास नोटा का कोई विकल्प नही दिया गया है, पंचायत चुनाव में मतदान के समय मतदाताओं को उठे हुए सभी प्रत्याशीयों में से किसी एक को अपना वोट देना ही पड़ेगा, जिला निर्वाचन अधिकारी रूद्रप्रयाग मंगेश घिल्डियाल का कहना है पंचायत चुनाव में आयोग द्वारा नोटा की व्यवस्था नही की गयी है, बैलेट पेपर में उतने ही सिम्बल मतदाताओं को मिलेगें जितने प्रत्याशी चुनाव मैदान में होंगें।
जानिए आखिर क्या होता है नोटा (NOTA)
आपको किसी राजनीतिक पार्टी का कोई उम्मीदवार पसंद न हो और आप उनमें से किसी को भी अपना वोट देना नहीं चाहते हैं तो फिर आप क्या करेंगे? निर्वाचन आयोग ने ऐसी व्यवस्था की है कि वोटिंग प्रणाली में एक ऐसा तंत्र विकसित किया जाए ताकि यह दर्ज हो सके कि कितने फीसदी लोगों ने किसी को भी वोट देना उचित नहीं समझा है.(NOTA) का मतलब नान ऑफ द एव ब यानी इनमें से कोई नहीं है. अब चुनाव में आपके पास एक और विकल्प होता है कि आप "इनमें से कोई नही" बटन दबा सकते हैं. यह विकल्प है (NOTA) इसे दबाने का मतलब यह है कि आपको चुनाव लड़ रहे कैंडिडेट में से कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है
साल 2009 में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से नोटा का विकल्प उपलब्ध कराने संबंधी अपनी मंशा से अवगत कराया था. बाद में नागरिक अधिकार संगठन पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज ने भी नोटा के समर्थन में एक जनहित याचिका दायर की. जिस पर 2013 को न्यायालय ने मतदाताओं को नोटा का विकल्प देने का निर्णय किया था. हालांकि बाद में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि नोटा के मत गिने तो जाएंगे पर इसे रद्द मतों की श्रेणी में रखा जाएगा.
