उत्तरकाशी- ट्रक हादसा! दो की मौत दो घायल! खतरा बन गई है लचर स्वास्थ्य व्यवस्था..

उत्तरकाशी- ट्रक हादसा! दो की मौत दो घायल! खतरा बन गई है लचर स्वास्थ्य व्यवस्था..
फोटो- दुर्घटनाग्रसत ट्रक।
फोटो- दुर्घटनाग्रसत ट्रक। 
हरीश थपलियाल/उत्तरकाशी। 
उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ में देर रात एक ट्रक दुर्घटना ग्रस्त हो गया, जिसमें दो लोगों की मौत हो गयी जबकि दो अन्य घायल हो गये, हादसा चिन्यालीसौड़ धरासू पावर हाउस के पास हुआ, जहां भटटी खाल के पास एक ट्रक अनियंत्रित होकर खाई में गिर गया, जिसमें चार लोग सवार थे, देर रात ही पुलिस ने रेस्क्यू अभियान चलाया और घायलों को सीएचसी चिन्यालीसौड़ में भर्ती करवाया, वही बताया जा रहा है ट्रक में सवार सभी लोग नेपाली मूल के थे, दोनों मृतकों का टिहरी के जिला अस्पताल बौराड़ी पीएम की कार्यवाही चल रही है। 
तमाम आदेशों-निर्देशों के बावजूद प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। अधिकांश सरकारी अस्पताल दवाओं, उपकरणों और मैन पावर की कमी से जूझ रहे हैं। इसका खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ रहा है। सवाल यह है कि इस अव्यवस्था की मुख्य वजहें क्या हैं? क्या अस्पतालों को जारी किए जा रहे बजट का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है या स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही के कारण स्थितियां बिगड़ती जा रही हैं? क्या अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग में फैला भ्रष्टाचार इसकी बड़ी वजह है? क्या सरकार को इस व्यवस्था में सुधार की जरूरत महसूस नहीं हो रही है? आखिर अस्पतालों में चिकित्सकों, उपकरणों और दवाओं की कमी का जिम्मेदार कौन है? क्या सबको बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा ऐसे साकार हो सकेगा?


उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाएं कई कारणों से चरमरा गई हैं। अधिकांश जिला अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी है। अस्पतालों में चिकित्सक और कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचते हैं। लिहाजा मरीजों को पर्चा बनवाने और चिकित्सक की सलाह लेने के लिए घंटों लाइन लगानी पड़ती है। अस्पतालों में कई स्तर पर भ्रष्टाचार व्याप्त है। दवाओं की खरीद-फरोख्त में अनियमितता बरती जाती है। कमीशनखोरी का खेल होता है। 


प्रतिबंध के बावजूद तमाम चिकित्सक निजी प्रैक्टिस में लिप्त हैं। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल प्रशासन को इसकी जानकारी होती है लेकिन वह कार्रवाई करने से कतराता है। कई अस्पतालों में उपकरण बेहद पुराने हो चुके हैं लेकिन उन्हें बदला नहीं गया है। इसके कारण मरीज की जांच करने में काफी वक्त बर्बाद होता है। अधिकांश अस्पतालों में दवाओं का टोटा रहता है। जब जिला अस्पतालों का यह हाल है तो प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का अंदाजा लगाया जा सकता है। 
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टीकाकरण केंद्र में तब्दील हो चुके हैं। अधिकांश सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक खोजे नहीं मिलते हैं। इसके कारण जिला अस्पतालों में मरीजों का बोझ बढ़ता जा रहा है। इसकी बड़ी वजह इन अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी भी है। यह स्थिति तब है जब मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए भारी भरकम बजट स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका सीधा प्रभाव गरीब मरीजों पर पड़ता है जो निजी अस्पतालों में महंगा इलाज नहीं करा सकते हैं। सबसे बड़ी बात यह है की सीमांत जनपद उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़ आदि जनपदों में यह देखा गया है की सड़क हादसों में गंभीर घायलों को फर्स्ट एड देकर रैफर किया जाता है। फर्स्ट एड नही असली वाला नही होता। मान लीजिए सड़क हादसे के दौरान किसी घायल की आंतरिक रक्त-श्राव होता है तो यहां चिकित्सकों के पास ऐसा कोई साधन नही है जिससे बह रहे खून को रोका जा सके। होता क्या है डॉक्टर उसे हायर सेंटर रैफर करता है और मरीज रास्ते मे ही दम तोड़ देता है। 
अक्सर उत्तरकाशी जिले के सरकारी अस्पतालों में ऐसा देखा गया है। जो बहुत चिंता का विषय है। देर रात उत्तरकाशी के गंगोत्री हाइवे पर भट्टी खाल के समीप एक ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें चार लोग सवार थे। जिसमें एक की मौके पर ही मौत हुई। बाकी दो घायलों को चिन्यालीसौड़ CHC में भर्ती कराया गया था। साथ ही गंभीर रूप से घायल को देहरादून रेफर किया गया था। जिसने रास्ते मे ही दम तोड़ दिया था। ट्रक में सभी  सवार नेपाल मूल के थे। ओर उत्तरकाशी से टिहरी की और जा रहे थे। 


जिस वक्त हादसा हुआ था। बताया जा रहा है की दुर्घटना का कारण ओवर टेक था। मगर दुर्घटना का कारण कुछ भी रहा हो क्योंकि होनी को कोई टाल नही सकता मगर लचर स्वास्थ्य सेवाओं की वजह से लोगों की जान चली जाती है। इसीलिए पहाड़ी खबर नामा की सरकार से अपील है की  यदि सरकार लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना चाहती है तो उसे इस अव्यवस्था को सुधारना होगा। चिकित्सकों, उपकरणों और अन्य सुविधाओं को बढ़ाना होगा। साथ ही अस्पतालों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाना होगा।
ऐसी स्थिति रैफर होते हैं मरीज
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ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों पर हालात अधिक खराब हैं। रात के समय ग्रामीणों का स्वास्थ्य राम भरोसे होता है। उधर, सामान्य अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी के कारण मरीजों को हायर सेंटर का रास्ता दिखाया जा रहा है। हर माह सैकड़ो मरीज रेफर किए जा रहे हैं। जब गंगोत्री नेशनल हाइवे या ग्रामीण मार्गो हादसे होते हैं तो अस्पतालों की पोल खुल जाती है।किस स्थिति में हो रहे रेफर
  • - हेड इंजरी्र
  • - हर्ट से संबंधित गंभीर बीमारी
  • - लीवर फेलियर
  • - बर्न केस
  • - वेंटिलेटर की आवश्यकमा वाले
  • - टीबी के मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड नहीं है। इसलिए रेफर किए जाते हैं।
  • - डिलीवरी के दौरान अधिक रक्तश्राव होने की स्थिति में।

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