निर्विरोध प्रधान का आखिर क्योें कर दिया गांव ने सामाजिक बहिष्कार! पढ़िए पूरी खबर...


निर्विरोध प्रधान का आखिर क्योें कर दिया गांव ने सामाजिक बहिष्कार! पढ़िए पूरी खबर...

 निर्विरोध प्रधान रेखा पुजारी
पहाड़ी खबरनामा डेस्क। 

मुख्य बातेंः- 
  • चंपावत जिले में लोहाघाट के कलीगांव में ग्रामीणो ने किया था चुनाव बहिष्कार। 
  • गांव की एक महिला प्रत्याशी में गुपचुप ढ़ग से करवा लिया अपना नामांकन। 
  • आक्रोशित ग्रामीणोें ने कर दिया निविैरोध ग्राम प्रधान का सामाजिक बहिष्कार। 
  • गांव में नगर पंचायत द्वारा कूड़ा डालने के विरोध में किया था चुनाव बहिष्कार। 

चंपावत। पुरानी कहावत है कि जंग और प्यार में सबकुछ जायज है, लेकिन इसके साथ राजनीति में भी सबकुछ जायज है, और आखिर में जो जीता वही सिकन्दर है, फिर चाहे जीत कैसे भी मिली हो। यही कारण है कि चंपावत जिले में लोहाघाट के कलीगांव में हाल ही में निर्विरोध प्रधान बनी रेखा पुजारी का गांव ने सामाजिक बहिस्कार कर दिया। वैसे तो किसी गांव का निर्विरोध प्रधान बनना गौरव की बात होती है, और निर्विरोध प्रधान को गांव के सम्भवतः सभी लोगों का समर्थन प्राप्त होता है, लेकिन लोहाघाट के इस गांव में ठीक उल्टा हुआ, बिना लोगों की पसन्द के ही एक महिला अपनी चालाकी से ग्राम प्रधान का निर्विरोध चुनाव जीत गयी, और गांव वाले हाथ मलते रह गये, जिसके बाद आखिरकार ग्रामीणों ने निर्विरोध प्रधान का सामाजिक बहिष्कार का फैसला कर दिया। 




उत्तराखण्ड़ में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान चम्पावत में एक ऐसी हैरत भरा राजनितिक घटनाक्रम सामने आया है। चंपावत जिले में लोहाघाट के कलीगांव में एक महिला प्रत्याशी चालाकी से निर्विरोध जीत गांव का प्रधान बनने वाले चुनाव प्रत्याशी का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है. ग्रामीणों में निर्विरोध प्रधान बनने वाले प्रत्याशी के प्रति जोरदार आक्रोश देखने को मिला हैं दरअसल पास की नगर पंचायत द्वारा गांव के जंगल में कूडा डाला जा रहा था, जिसके भारी विरोध के बाद भी कूड़ा डाला जाता रहा, ऐसे में आखिरकार ग्रामीणों ने इसके विरोध स्वरूप चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर दिया। लेकिन गांव की ही एक महिला प्रत्याशी इस बीच चुपचाप अपना नामांकन भर आयी, ऐसे में वो निर्विरोध प्रधान बन गई। लोहाघाट के कलीगांव में प्रधान के निर्विरोध जीते जाने के बाद सारा गांव छला हुआ महसूस कर रहा है।




प्रदेश में पंचायत चुनाव का ऐलान होने के बाद ग्रामीणों ने नगर पंचायत कार्यालय में प्रदर्शन भी किया था और चेतावनी दी थी कि अगर नगर पंचायत उनके जंगल में कूड़ा डालना बंद नहीं करती तो वह चुनाव का बहिष्कार करेंगे। और आखिरकार ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार कर दिया, लेकिन गांव की ही एक महिला प्रत्याशी इस बीच चुपचाप अपना नामांकन भर आयी, जिसके बाद गांव में 869 मतदाताओं में से कुल 9 ही वोट पड़े। इनमें भी तीन तो चुनाव लड़ने वाली रेखा पुजारी, उनके पति और सास के हैं बाकी कुछ लोगों के। वहीं निर्विरोध प्रधान बनने वाली रेखा पुजारी कह रही हैं कि उन्होंने चुनाव लड़ने के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग किया है। वह भी गांव की बेटी हैं। गांववालों से बात करेंगी और उन्हें मना लेंगीं। 


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