उत्तरकाशी।। पंचायत चुनाव में स्थायी टैग हो गया अतिसंवेदनशील बूथ !

हरीश थपलियाल/ उत्तरकाशी।।। यह पोलिंग बूथ चिन्यालीसौड़ प्रखंड का कुमराड़ा गांव दिचली पट्टी में आता है।  निर्वाचन आयोग ने यहां 1997-98  में चुनाव के दौरान दो समूहों के बीच खूनी संघर्ष हुआ था। जिसके बाद इस मतदान केंद्र को अति संवेदनशील घोषित किया था। इसी तरह जिले के सैकड़ों ऐसे गांव हैं। जहां निर्वाचन के द्वारा अति संवेदनशील औऱ संवेदनशील किया गया है। लेकिन गांव वालों के मुताबिक, इसके बाद से गांव के लिए यह एक स्थायी टैग हो गया है।

कहीं दशकों पहले तो कहीं पांच साल पूर्व निर्वाचन आयोग ने लिया था फैसला, अब तक ग्रामीण परेशान चुनाव तारीखों की घोषणा के वक्त आयोग इस बात की भी जानकारी देता है कितने पोलिंग बूथ संवेदनशील या अति संवेदनशील हैं।  कानून व्यवस्था के लिहाज से इन पोलिंग बूथों का आकलन किया जाता है और उसी के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था भी की जाती है। यह कोई जिले की एक गांव का मामला नही बल्कि सैकड़ो गांव ऐसे हैं।  लेकिन अब ग्रामीण यह तमगा हटाना चाहते हैं जो सालों से लगा हुआ है।



चिन्यालीसौड़ और नौगांव ब्लॉक में हुए दूसरे चरण के  मतदान के दौरान रौंतल गांव निवासी मूर्ति राम मिश्रा, राम व्यास नॉटियाल, उदय शंकर शास्त्री, शांति राम मिश्रा, कांति राम मिश्रा, दया शंकर मिश्रा, हर्षमणी नौटियाल, आशीष लाल, नवीन लाल, राकेश लाल

बताया कि घटना के बाद से पांच आम चुनाव हुए हैं और सभी शांतिपूर्ण रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है  गांव बहुत विकसित हो गया है और हम प्रगति से खुश हैं लेकिन इसके अति संवेदनशील होने से न केवल हमारी छवि प्रभावित होती है बल्कि भविष्य की संभावनाएं भी प्रभावित होती हैं।




उन्होंने कहा, 'इतना लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी कोई दुर्घटना नहीं हुई है तो ऐसे में हम सरकार के साथ-साथ चुनाव आयोग से भी अपील करते हैं कि इसकी समीक्षा की जाए और अति संवेदनशील के टैग को हटाया जाए'।।।


जिले में पंचायत चुनाव का प्रथम-(डुंडा-भटवाड़ी)-द्वितीय(नौगांव-पुरोला) चरण शांति पूर्ण सम्पन्न हो चुका हैं। औऱ अब तृतीय चरण में 16 अक्टूबर को पुरोला और मोरी ब्लॉक में जिला पंचायत सदस्य औऱ ग्राम प्रधान, बीडीसी मेम्बर के लिए मतदान होगा।   इस बार के पंचायत चुनाव में  मुद्दा सिर्फ रोजगार या सड़क ही नहीं है, बल्कि मतदान केंद्र पर लगा अति संवेदनशीलता का तमगा भी है, जो मतदाताओं को खलता है।।।
 किस बूथ को किस कैटेगरी में रखा जाना है इसके लिए देखा जाता है कि उस बूथ की हिस्ट्री क्या रही है। जहां झगड़े की पुरानी हिस्ट्री रही होती है वहां विशेष नजर रखी जाती है। रिस्क या सिक्योरिटी को ध्यान में रखकर ही श्रेणियां बनाई जाती हैं। इसके लिए पुलिस और लोकल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट को भी आधार बनाया जाता है।
दरअसल संवेदनशील और अति संवेदनशील बूथों के साथ क्रिटिकल बूथों की जो श्रेणी बनाई जाती है वो पुलिस विभाग की तरफ से काफी लंबी एक्सरसाइज के बाद ही फाइनल हो पाती है। इसके लिए विभाग लोकल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट की भी मदद लेता है।
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 ऐसी रहती है सुरक्षा व्यवस्था
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अमूमन एक बूथ पर 1 पुलिसकर्मी और एक होमगार्ड के जवान को तैनात किया जाता है।  लेकिन संवेदनशील, अति संवेदनशील और क्रिटिकल बूथों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहते हैं। जहां पर एक  एसआई साथ ही पीएससी के जवान हथियारों से लैस होते हैं।  नॉर्मल बूथों के मुकाबले इन बूथों पर माइक्रो ऑब्जर्व से लेकर वीडियोग्राफी तक की व्यवस्था का भी प्राविधान होता है  ताकि चुनाव प्रक्रिया को किसी भी तरह से बाधित न किया जा सके।।

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