एक्सक्लूसिव बैकिंग- चिन्यालीसौड़ बन सकता है वायु सेना एयर बेस- सूत्र! चीन चाहता था यहांपर अपना कब्जा!
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| हरीश थपलियाल |
सूत्रों की माने तो भविष्य में चिन्यालीसौड़ को वायु सेना एयर बेस बना सकती है। वायुसेना की अभ्यास प्रक्रिया से यहाँ के स्थानीय लोगों में खासा जोश दिख रहा है। उत्तरकाशी चीन सीमा से लगा सीमांत जिला है। सुरक्षा के लिहाज वायुसेना और सेना यहां संवेदनशील मानती है। जानकारों के मुताबिक चीन दशकों से चाहता था की उत्तरकाशी का अधिकांश भू-भाग उसके कब्जे में हो, यहां तक की चिन्यालीसौड़ तक चाइना अपना इलाका मानता था। लेकिन ऐसा हो न सका।
क्योंकि भारतीय सेना के जांबाज वीरों ने चीन सीमा युद्ध के दौरान 1962 में चीन के दांत खट्टे कर दिए थे। आज भारत अपना सबसे घातक हथियार लेने वाला है। सेना सूत्रों के मुताबिक अंबाला एयरबेस पर पहले से जगुआर और मिग 21 बाइसन तैनात हैं। जगुआर अंदर तक घुसकर मार करने वाला फाइटर विमान है। करगिल जंग के दौरान पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार भगाने वाले मिग 21 का स्क्वाड्रन गोल्डन ऐरो 17 स्क्वाड्रन में राफेल को शामिल किया जाएगा।
वायु सेना सूत्रों के अनुसार राफेल मिलने जा रहा है। 17 स्क्वाड्रन अपनी पुरानी गौरवशाली पंरपरा को कायम रखेगा । 2011 में गोल्डन ऐरो 17 स्क्वाड्रन को खत्म कर दिया गया था क्योंकि मिग 21 फाइटर विमान रिटायर हो गए थे। अब गोल्डन ऐरो 17 स्क्वाड्रन को राफेल के जरिए फिर से बहाल करने का फैसला लिया गया। अंबाला से राफेल के जरिए पाकिस्तान पर नजर रखी जाएगी तो बंगाल के हाशिमारा बेस से चीन की हरकतों पर राफेल नजर रखेगा।
मल्टी रोल लड़ाकू विमान राफेल आसमान में मुकाबला करने के साथ दुश्मन के घर में घुसकर वार करने का माद्दा रखता है। भारत ने सितंबर 2016 में फ्रांस से 36 राफेल विमान करीब 58000 करोड़ में खरीदने का फैसला किया था। 2022 तक फ्रांस 36 राफेल विमान भारत को सौंप देगा।
राफेल के अंबाला और हाशिमारा एयरबेस पर तैनाती से साफ है भारत दो मोर्चों पर दुश्मन की किसी भी हिमाकत का जवाब देने के लिए तैयार है ताकि जब ऐसा समय आए तो दुश्मन को करारा जवाब दिया जा सके।

