चिन्तन- रूद्रप्रयाग में महिलाऐं मतदान में आखिर क्यों रह गयी पुरूषों से 20 प्रतिशत पीछे..?
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| फोटो- बीते रोज मतदान के दिन भी खेती के काम में लगी महिलाऐं |
सत्यापाल नेगी/रूद्रप्रयाग
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में रूद्रप्रयाग के ऊखीमठ में कुल 72.71 प्रतिशत मतदान भले ही जिला निर्वाचन अधिकारियों के लिए अपनी पीठ थपठपाने वाला हो सकता है लेकिन ऊखीमठ में प्रथम चरण के इस मतदान में एक चिन्तनीय और मंथन करने वाली बात ये सामने आई है कि आमतौर पर हमेशा अग्रीण दिखने वाली पहाड़ की नारी शक्ति आखिर मतदान में पुरूषों से इतनी पीछें क्यों रह गयी, ऊखीमठ में प्रथम चरण के मतदान में महिलाऐं पुरूषों से एक या दो प्रतिशत नही बल्कि भारी भरकम 20 प्रतिशत अन्तर से पीछे रही हैं।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के प्रथम चरण में में रूद्रप्रयाग में ऊखीमठ में मतदान को लेकर वोटरों में काफी उत्साह देखा गया, यही कारण रहा ही प्रथम चरण में रिकार्ड 72.71 प्रतिशत मतदान हुआ, जो कि जिला निर्वाचन अधिकारियों के लिए खुशी की बात है, जिले में प्रथम चरण में ऊखीमठ में हुए मतदान में कुल 33682 मतदाताओं में से 24491 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो कि कुल मतदाताओं के 72.71 प्रतिशत था, ये आंकड़े राहत देने वाले है लेकिन इन्ही आंकड़ों का अगर थोड़ी और विश्लेषण किया जाए तो ये चिन्तनीय भी बन जाते हैं, ऊखीमठ में पुरूषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्या भले ही ज्यादा हों लेकिन मतदान करने में महिलाऐं काफी पीछे रह गयी।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार ऊखीमठ में 16174 पुरूष मतदाताओं में से 13418 पुरूष मतदाताआं ने बढ़चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया जो कि पुरूषों के कुल मतदाता संख्या के 82.96 प्रतिशत है, लेकिन दूसरी और 17508 महिला मतदाताओं मेें से मात्र 11073 महिला मतदाता ही अपने मताधिकारी का प्रयोग करने पोलिंग बूथों तक पहुची, जो कि महिला मतदाताओं की कुल संख्या के 63.24 प्रतिशत है, यानी महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरूषों से करीब 20 प्रतिशत कम रहा।
आखिर क्या ही महिलाओं द्वारा कम मतदान का कारण-
वरिष्ठ पत्रकार अनुसूया प्रसाद मलासी का कहना है कि नवरात्र और खेती का सीजन इसका बड़ा कारण हो सकता है, क्योकि नवरात्र चल रहे हैं ऐसे में ज्यादातर महिलाओं ने व्रत रखा हुआ है जो कि पूर्जा अर्चना में ही व्यस्त रही ऐसे में कई महिलाऐं मतदान केन्द्र तक मतदान करने नही पहुची, वही दूसरा आजकल धान की कटाई मडाई का सीजन भी है, करीब एक सप्ताह बाद धूप खिली ऐसे में खेतों का काम व पराल को खेतों में धूप में सुखाने के लिए अच्छा मौसम था, ये भी महिलाओं के ज्यादा संख्या में मतदान केन्द्र तक न पहुचने का बड़ा कारण रहा।
वही दूसरी और घर से बाहर नौकरी करने वाले पुरूष मतदाता बड़ी संख्या में अपने गांव मतदान करने पहुचे, मतदान करने गांव पहुचे पुरूषों का एकमात्र उछेश्य मतदान करना था, ऐसे में पुरूषों के मतदान प्रतिशत में बड़ी बढोत्तरी देखी गयी, वही कई जानकार मानते हैं कि पंचायत चुनाव में गांव में होने वाली आपसी कटुता के कारण भी कई महिलाओं ने मतदान से दूरी बनाई, खैर कारण जो भी हो लेकिन मंथन करना जरूरी है कि आखिर क्या कारण रहा कि हमेशा मतदान में आगे रहने वाली महिलाऐं इस बार पुरूषो से पिछड़ गयी।
