पंचायत का पैसा ठिकाने लगाने में ग्राम प्रधान, प्रधानपति व पंचायत सचिव शामिल, निवर्तमान ग्राम प्रधान सहित चारों के खिलाफ मुकदमा, दर्जकूट रचना के तहत पंचायत के खाते से गलत तरीके से निकाला गया पैसा, प्रतीतनगर में हाइवे प्रभावितों के नाम दुकानों के निमार्ण और आवंटन में धांधली
महेश पंवार / रायवाला।
जिलाधिकारी के आदेश पर प्रतीतनगर की ग्राम प्रधान शोभा रावत, प्रधानपति विवेक रावत सहित दो सेवा निवृत्त ग्राम पंचायत विकास अधिकारी प्रदीप गुप्ता और प्रकाश चंद के खिलाफ रायवाला पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस को दी तहरीर में चारों पर हाइवे प्रभावितों को रोजगार देने के लिए बनायी जा रही दुकानों के निर्माण में कूटरचना के तहत पैसा ठिकाने लगाने का आरोप लगाया है। जांच के दौरान पंचायत खाते से करीब साढ़े 14 लाख रूपये की हेराफेरी सामने आयी है।
मामला हरिद्वार देहरादून राजमार्ग पर चैड़ीकरण के दौरान प्रभावित हुए लोगांे के लिए दुकानों के निर्माण और आवंटन का है। जिलाधिकारी द्वारा जिला पंचायत राज अधिकारी को दिए गए आदेश पर एडीओ पंचायत श्याम लाल जोशी ने देर रात रायवाला थाने में प्रतीतनगर की निवर्तमान ग्राम प्रधान शोभा रावत, उसके पति विवेक रावत, तत्कालीन ग्राम पंचायत विकास अधिकारी प्रकाश चन्द व प्रदीप कुमार गुप्ता के खिलाफ तहरीर देते हुए मुकदमा दर्ज कराया। आपको बता दें कि दोनों ग्राम पंचायत विकास अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं।वहीं विभागीय जांच में यह साबित हो चुका है कि चारों के खिलाफ उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली का उल्लंघन किया है। जांच में यह बात सामने आई है कि निवर्तमान ग्राम प्रधान, प्रधान पति और ग्राम विकास अधिकारियों ने हरिद्वार-दून हाइवे के चैड़ीकरण से प्रभावित स्थानीय लोगों के रोजगार के पंचायत के खाते से लाखों की हेरीफेरी की है। जिलाधिकारी द्वारा कराई गई जांच में प्रधान पति विवेक रावत के नाम पर 12,50,500 (बारह लाख पचास हजार पांच सौ) रूपये व ग्राम पंचायत विकास अधिकारी प्रकाश चन्द के नाम पर 175,500 (एक लाख 75 हजार पांच सौ) रूपयों की गलत तरीके से निकासी की गयी है। वहीं पुलिस ने एडीओ पंचायत की तहरीर के आधार पर चारों लोगों पर सरकारी धन के अपव्यय व आहरित धनराशि के कृत्य के सम्बंध में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
आपको बता दें कि क्या है पूरा मामला
रायवाला।हरिद्वार देहरादून राजमार्ग पर चैड़ीकरण के दौरान प्रभावित प्रतीतनगर के व्यापारियांे रोजगार देने के लिए ग्राम पंचायत द्वारा पंचायती भूमि पर 24 दुकानें बनाए जाने का प्रस्ताव जिला पंचायत राज अधिकारी को भेजा। अगस्त 2016 में जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा दुकानों के निर्माण व आवंटन के लिए गाइड लाइन के साथ स्वीकृति दे दी गयी थी। गाइड लाइन के अनुसार सबसे पहले लाटरी सिस्टम से किराएदारों का चयन करना था और फिर चयनित प्रत्येक दुकानदार से दो लाख रुपये की धनराशि पंचायत के खाते में जमा करानी थी। उक्त धनराशि से दुकानों का निर्माण कार्य शुरू कराया जाना था। जिला पंचायत राज अधिकारी की गाइड लाइन के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया की सूचना समाचार पत्रों, पंचायत की बैठक व सूचना पट के माध्यम से प्रत्येक प्रभावित दुकानदार को दी जानी थी, जिससे अधिक से अधिक लोग लाटरी प्रक्रिया में शामिल हो सकें ताकि इस पूरे मामले में पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन खास बात यह है कि ग्राम पंचायत ने जिला पंचायत राज अधिकारी के आदेशों का पालन नही किया और बिना लाॅटरी किए ही दुकानों का निर्माण और आवंटन तक कर दिया। वहीं मामले मंे धांधली किए जाने की जांच की मांग को लेकर संबंधित अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद ग्राम पंचायत प्रतीतनगर के पूर्व उपप्रधान नंदकिशोर कंडवाल ने इस मामले माननीय हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की। माननीय उच्च न्यायालय के आदेश पर जिलाधिकारी ने मामले की जांच कर दोषियांे के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने को कहा। जांच में सभी चारों लोगों के दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ मुदकमा दर्ज कर लिया गया है।
याचिकाकर्ता पर हुआ था जानलेव हमला
रायवाला। प्रतीतनगर में पंचायत द्वारा बनाई जा रही दुकानों के निर्माण और आवंटन में धांधली का आरोप लगाते हुए पूर्व उप प्रधान नंद किशोर कंडवाल ने माननीय हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। नंद किशोर का कहना था कि मेरे द्वारा ऐसा करने पर प्रधानपति द्वारा मुझपर जानलेवा हमला किया गया था साथ ही मुझे जान से मारने की धमकी लगातार दी जा रही है।
