जानिए माॅ कुंजापुरी सिद्धपीठ के बारे में! पढ़िए पूरी कहानी..

जानिए माॅ कुंजापुरी सिद्धपीठ के बारे में! पढ़िए पूरी कहानी..
माॅ कुंजापुरी सिद्धपीठ
वाचस्पति रयाल/नरेंद्र नगर। 
इस वर्ष 29 सितंबर से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह तक चलेंगे। मां दुर्गा के नौ रूपों की विशेष स्तुति और आराधना के लिए अनादि काल से नवरात्र महापर्व को मनाए जाने की परंपरा देश में अनूठी एवं अध्यात्म के आधार पर रही है। नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के माने जाते हैं और इन दिनों मां दुर्गा की पूजा अर्चना एवं उपासना की जाती है। उत्तरी भारत के प्रसिद्ध सिद्ध पीठों में शुमार श्री कुंजापुरी सिद्ध पीठ ऋषिकेश से 28 और नरेंद्र नगर से 13 किलोमीटर दूर हिंडोला धार पर्वत शिखर पर स्थित है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु मन्नतें मांगने मत्था टेकने मां के दरबार में आते हैं।
ऐसी मान्यता है कि मां कुंजापुरी नवरात्रों में श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूर्ण करती है। उत्तराखंड देश का भाल है, जिसमें प्राचीन काल से यह क्षेत्र अध्यात्म का केंद्र रहा है। इस धरती को आदिकाल से ही ऋषि -मुनियों की तपस्थली माना जाता है। समुद्र तल से 6,300 फिट की ऊंची चोटी पर स्थित  यह सिद्ध पीठ श्रद्धालुओं की आस्था का ऐसा केंद्र है कि  वर्षभर देश-विदेश से श्रद्धालु मां के दर्शनों के लिए सिद्ध पीठ मंदिर पहुंचते हैं।

नरेंद्रनगर से मंदिर ठीक 13 किलोमीटर दूर है ,मगर हवाई दूरी बहुत ही कम है। नगर के ऊपरी हिस्से में स्थित पंच सितारा होटल आनंदा के पास हेलीपैड स्थित है, देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इसी हवाई मार्ग का उपयोग कर मां के दर्शनों के लिए मंदिर पहुंचते हैं। नरेंद्र नगर मां कुंजापुरी की चरण स्थली में वसा ऐतिहासिक नगरी है। नरेंद्र नगर में ही मां कुंजापुरी के मेले का आयोजन हर वर्ष दुर्गा अष्टमी के दिनों में किया जाता है।
स्कंद पुराण के केदारखंड में  उल्लेखित वर्णनानुसार पौराणिक काल में दक्ष प्रजापति यक्षों के अधिपति की चुनाव में प्रत्याशी थे, मगर उनके दामाद भगवान शिव ने इस चुनाव में दक्ष प्रजापति का साथ नहीं दिया, बावजूद इसके दक्ष प्रजापति चुनाव जीत गए। यक्षों के अधिपति चुने जाने के बाद दक्ष प्रजापति ने खुशी में  हरिद्वार गंगा नदी के पास कनखल में  महायज्ञ का आयोजन किया। सभी  देवताओं को इस यज्ञ में आदर पूर्वक निमंत्रित किया गया, मगर भगवान शिव और मां सती को यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया गया ।

यज्ञ की भनक लगते ही मां सती ने यज्ञ में जाने की  मनसा भगवान शिव से जताई मगर बगैर आमंत्रण के भगवान शिव के मना करने के बावजूद माता सती शिवजी से आज्ञा लेकर यज्ञ स्थल पर पहुंच गई। मां सती ने देखा कि सभी बंधु- बांधव उनसे मुख फेरने के साथ उल्टे ताने भी सुना रहे हैं कोई उनकी आवभगत तो क्या खुशखबरी तक नहीं पूछ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने देखा कि यज्ञ में मौजूद सभी देवताओं के नाम से वहाँ शिलापट्ट व आसन लगे थे, मगर भगवान शिव का कहीं नाम तक अंकित न था। इस तरह के निरादर से अति क्रोधित होकर माता सती यज्ञ के हवन कुंड में कूद गई।
भगवान शिव को जैसे ही इस अनहोनी का पता लगा शिव के आदेश पर शिवसेना प्रमुख वीरभद्र ने यज्ञ स्थल पर पहुंचकर यज्ञ को विध्वंस कर डाला और दक्ष प्रजापति का शीश काट डाला। भगवान शिव का प्रचंड रूप देख देवताओं ने भगवान शिव से इस आधा-अधूरे यज्ञ को पूरा करने की विनती की तो एक भेड़े का सिर काटकर दक्ष के शरीर पर रख दिया गया।
यज्ञ पूरा होने के बाद भगवान शिव ने हवन कुंड से मां सती का शरीर अपने त्रिशूल और कंधों पर उठा लिया, और सती के वियोग में अत्यंत क्रोधित व प्रचंड रूप में धरती पर विचरण करने लगे,यह देख देवता भयभीत हो उठे कि कहीं  शिवजी सृष्टि का विनाश न कर डालें। सभी देवताओं की विनती पर भगवान विष्णु ने  अपने  सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 52 टुकड़ों में  विच्छेदन पर डाला। जहां-जहां भी सती के शरीर के ये अंग गिरे वहां-वहां शक्ति पीठ स्थापित होते चले गए ।

नरेंद्र नगर के पास हिंडोलाधार पहाड़ी के शिखर पर मां शक्ति का कुज (स्तन) भाग गिरा यहां पर श्री कुंजापुरी सिद्ध पीठ स्थापित हुआ। इसलिए माना जाता है कि यहां पर मां का सबसे दयालु स्वरूप है मां यहां आने वाले अपने भक्तों से अल्प समय में ही प्रसन्न हो जाती है, श्री कुंजापुरी प्रसिद्ध सिद्ध पीठ के नाम से नरेंद्र नगर में वर्ष 1974 से श्री कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले की बड़े स्तर पर शुरुआत की गई है। मां सती के नाम पर आयोजित होने वाले इस मेले की शुरुआत तत्कालीन जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह पांगति, पूर्व पालिका उपाध्यक्ष ठाकुर किशोर सिंह, शिवलाल भंडारी, सोबन सिंह नेगी व  सुबोध उनियाल को जाता है। श्री कुंजापुरी सिद्ध पीठ मंदिर में देश-विदेश से श्रद्धालु मां के दर्शनों को आते हैं, मन्नतें मांगते हैं। और कहा जाता है कि जो यहां श्रद्धा पूर्वक मां के दर्शन करने आता है उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। इसीलिए मां सती को सभी कार्यों की सिद्धिदात्री माना जाता है।
माॅ कुंजापुरी सिद्धपीठ
फोटो- मेले की तैयारियों का जायजा लेते मंत्री सुबोध उनियाल व नगर पालिका अध्यक्ष राजेंद्र विक्रम सिंह पवार
मां कुंजापुरी के नाम पर आयोजित होने वाले श्री कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले को भव्य रूप देने और बड़े स्तर पर आयोजित करने का पूरा-पूरा श्रेय क्षेत्रीय विधायक और प्रदेश के कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल को जाता है। पिछले वर्ष मेले के आयोजन पर 32 लाख का खर्चा आया था, इस बार मेले की भव्यता को देखते हुए हैं इससे कहीं अधिक धनराशि खर्च होने का अनुमान है। कुंजापुरी मेले की तैयारियों को किस तरह से  अंतिम रूप दिया जा रहा है इसके निगरानी के लिए क्षेत्रीय विधायक और प्रदेश के कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल ने बाजार में और पांडाल में पूरी व्यवस्था दी कि उनके साथ राजेंद्र विक्रम सिंह पवार व अन्य सभासद भी थे 

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