जब नामांकन के वक्त जन्मा तीसरा बच्चा! आगे खाई पीछे कुआँ ?

नामांकन के वक्त जन्मा तीसरा बच्चा ! आगे खाई पीछे कुआँ ? 
नामांकन के वक्त जन्मा तीसरा बच्चा
हरीश थपलियाल/उत्तरकाशी।
इस बार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों के लिए तय किये गए मानकों ने  गांव के राजनैतिक धुरंधरों का समीकरण बिगाड़ कर रख दिया है। ग्राम पंचायत में सैकड़ों ऐसे लोग थे जो बीते सालों से गांव में मजबूत तैयारी के साथ जीत का दावा भर रहे थे। लेकिन सरकार के फैसले से इनकी तैयारियों पर ग्रहण लगा है।  मगर कई ग्राम सभाओं में  ऐसे प्रत्याशियों ने नामांकन किया। जिनकी किसी भी प्रकार से कोई तैयारी नही थी। जिसके चलते प्रत्याशियों के नामांकन रद्द हुए। चिन्यालीसौड़ ब्लॉक के गड़त-बनाड़ी से तो एक ऐसा मामला सामने आया है, की उनके सामने आगे खाई है औऱ पीछे कुआँ है। दरअसल इस गांव में सदस्य क्षेत्र पंचायत में तीन प्रत्याशी मैदान में है। कृतम सिंह पंवार,जयवीर कठैत और शम्भू प्रसाद जोशी हैं।


ध्यान देने वाली बात ये है की शम्भू प्रसाद जोशी जी ने जब नामांकन करवाया तो घर से सूचना मिली की आपका तीसरा बच्चा जन्मा है। जबकि बीडीसी मेम्बर में तीन बच्चों वाला नियम लागू है। अब ऐसे में विरोधियों को क्या चाहिए था। विरोधियों ने नामांकन रद्द करवाने की काफी कोशिशें की लेकिन नियम के तहत फिलहाल नामांकन रद्द नही हो सका।
लेकिन शम्भू प्रसाद को आगे मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। रिटर्निंग ऑफिसर ईं. सुरेश तोमर ने बताया की बीडीसी मेम्बर प्रत्याशी शम्भू प्रसाद जोशी के तीसरा बच्चा होने का मामला संज्ञान में है। अभी तक इनका नामांकन स्वीकार कर लिया गया है। जीत के बाद तीसरे बच्चे को लेकर पंचायती राज एक्ट में क्या उल्लेख है, इसी के तहत कार्यवाही होगी। उन्होंने बताया की सदस्य क्षेत्र पंचायत के 12,ग्राम प्रधान 6, वार्ड मेंबर के 56 नामांकन निरस्त हुए।


ये है पंचायत प्रतिनिधियों के लिए अलग-अलग नियम।।
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राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य और क्षेत्र व जिला पंचायत सदस्य पदों पर अर्हता के मानक अलग-अलग हैं। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने पंचायतीराज एक्ट में प्रावधान किया कि सिर्फ दो बच्चों वाले लोग ही पंचायत चुनाव लड़ने के योग्य होंगे। इस मामले को कुछ लोगों ने अदालत में चुनौती दी। अदालत ने साफ किया कि इस संशोधन को लागू करने की कट ऑफ डेट 25 जुलाई 2019 होगी। यानी इस तारीख के बाद दो से अधिक बच्चे वाले प्रत्याशी पंचायत चुनाव लड़ने के अयोग्य माने जाएंगे। अलबत्ता, 25 जुलाई 2019 से पहले जिनके तीन बच्चे हैं, वे चुनाव लड़ सकते हैं। सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, मगर वहां से उसे स्थगनादेश नहीं मिल पाया। अलबत्ता, सरकार की ओर से हाईकोर्ट के आदेश को ग्रामप्रधान व ग्राम पंचायत सदस्य पदों के लिए अमल में लाया गया है। क्षेत्र व जिला पंचायत सदस्य पदों के लिए सरकार ने ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की है।

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