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| माँ राज राजेश्वरी विराजमान माता के मंदिर |
चिन्यालीसौड़ प्रखंड के गमरी पट्टी क्षेत्र अंतर्गत अदनी- रोंतल गांव के दाहिने भू-भाग में स्थापित सिद्ध पीठों में एक माँ राज राजेश्वरी विराजमान है। जानकारों की माने तो इस मंदिर की स्थापना दशकों साल पहले जगत गुरु आदि शंकराचार्य ने की थी।। स्थापित इस मंदिर के आसपास विद्यालय और स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित हो रहा है। यहां तैनात विभागीय कर्मचारियों का मानना है कि यहाँ माता रानी का आशिर्वाद से ही कुशल क्षेम है।। बीते 12 वर्षो से स्वास्थ्य उपकेंद्र में तैनात फार्मासिस्ट गिरीश भूषण नौटियाल का कहना हैं, जिस स्थान पर विद्यालय या अस्पताल संचालित हो रहा है यह भूमि दिव्या और भव्य है।
इसका प्रमाण मुझे कई बार देखने को मिला, उन्होंने बताया कि मैं बचपन से ही माता का उपासक रहा हूँ, संयोग वस मेरी जब यहाँ तैनाती हुई तो मैं मुझे जानकारी के अभाव में नही मालूम था कि यह जगह सिद्धपीठ है। मुझे फिर भी यकीन न हुआ चुकीं यहाँ विद्यालय के बावजूद अध्यापकों की रहने की व्यवस्था नही हैं इसलिए पठन-पाठन के बाद विद्यालय के सभी अध्यापक अपने गंतव्य की ओर जाते, लेकिन आपातकाल व्यवस्था के तहत मुझे यहीं रहना होता है। इसी क्रम में शुरुआती दौर के दिनों में अकेले रहना मेरे लिए चुनौती भरा रहा। स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से मेने रात्री विश्राम करना स्वास्थ्य उप केंद्र में ही उचित समझा, शुरुआती दौर में थोड़ा यहाँ रुकना अटपटा सा लगा मगर माँ राज राजेश्वरी का साफ तौर पर संकेत थे, की माँ जगतम्बा कन्याओं को भोजन कराने से प्रश्न होगी।
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| माता के मंदिर में भंडारा |
संकेत के बाद भी मेरे लिए यह संभव न हुआ, लेकिन एक दिन अस्पताल के चारों और सांप ही सांप रहने जैसे प्रतीत हुआ, ऐसा लगा मानो जैसे सांप श्रृंगार के साथ नृत्य कर रहें हों। जिसके बाद खुद ब खुद मेरे मन मे विचार उत्पन्न हुए की मंदिर में मुझे कन्याओं, असहाय और गांव के गरीब जनों को भोजन कराना है। इसी उत्पन्न विचारों के बाद मैं माँ राज राजेश्वरी के निर्देश पर भंडारे के जरिये लोगों को भोजन करा सकूं। इसके लिए हर वर्ष माता रानी की मौजूदगी में ग्रामीणों के सहयोग से लोगों को भोजन की व्यवस्था करवाता हूँ।
शुक्रवार को आयोजित भंडारे में करीब 400 स्कूली छात्र-छात्राओं ने भोजन ग्रहण किया। उन्होंने बताया कि यह कोई आश्चर्य की बात नही की यहां पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। भंडारे करवाने का निष्कर्ष यह है कि विश्व में शांति बनी रहे, लोगों के बीच सदभावना हो, भाईचारा बना रहे। यही मां राजराजेश्वरी का निर्देश भी था।। माँ राज राजेश्वरी के मुख्य पुजारी रमेश थपलियाल ने बताया कि जिस तरह माँ चन्द्रबदनी, सुरकण्डा, नयना देवी सिद्धपीठ हैं इसी तरह माँ राज राजेश्वरी भी यहां आपरूपी विद्यमान हैं।। इस अवसर पर शिक्षक माधव नौटियाल शिक्षिका लाजवंती चौहान, माता के अनुयायी शांति राम मिश्रा, कांति राम बिजल्वाण, गणेश मिश्रा, अमर देव भट्ट, नत्थी राम मिश्रा, सुंदर लाल नौटियाल, गंभीर सिंह पंवार,विजय भूषण, जयवीर रावत, अजयपाल चौहान, गिरवीर चौहान समेत कई लोग मौजूद रहे।।

