दुनिया भर में मशहूर उत्तराखंड के लोगों को इसीलिए कहते हैं की पहाड़ के लोग सादगी और विनम्र होते हैं। इस बानगी तब देखने को मिली जब थल सेना के अध्यक्ष बिपिन रावत पत्नी के साथ अपने ननिहाल थाती गांव पँहुचें। और बड़ी सहजता के साथ वे अपने ममेरे भाई नरेंद्र सिंह परमार और उनके परिवार से मिले। जनरल रावत ने अपने बचपन की यादें ताजा की। उन्होंने अपने ममेरे भाई को उपहार दिए। इस दौरान उन्होंने अपने नाना के पंचपुरा घर भी गए।
ग्रामीणों ने उन्हें दाल के पकोड़े और पूरियां भी खिलाई। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड देवीभूमि है। औऱ आप लोग भाग्यशाली हैं जो यहां निवास कर रहे हो, यहाँ का गंगाजल पी कर पले बड़े हो। उन्होंने कहा कि सीएम त्रिवेंद्र रावत से धनारी क्षेत्र में मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज खुलवाने के लिए बात करूंगा। ताकि यहाँ से पलायन न हो सके। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद मैं यहाँ आता रहूंगा।
जनरल रावत के थाती गांव पहुँचने पर ग्रामीणों ने गौरवान्वित महसूस किया, और भारत माता की जयजयकार के नारे लगाए। जानकारी के मुताबिक जनरल रावत नाना लोग तीन भाई थे बड़े ठाकुर सूरत सिंह दूसरे और छोटे छोटे नाना ठाकुर किशन सिंह परमार थे,जो देश में संविधान सभा के सदस्य भी रहे। बड़ी बात यह है कि टिहरी प्रजा मंडल सरकार में शिक्षा मंत्री (एक साल पांच माह ) रहे। टिहरी स्टेट के भारत मे विलय के दिन से 1949 से 1952 तक टिहरी गढ़वाल से मनोनीत सांसद। उत्तरकाशी विधानसभा क्षेत्र के तीसरे विधायक बने।
बतातें हैं धनारी पट्टी का केंद्र बिंदु थाती गांव ही था। ठाकुरों का बना पंचपुरा घर इसका प्रमाण है। हालांकि अब यह पंचपुरा घर जीर्णशीर्ण हो चुका है। इस अवसर पर थाती गांव निवासी एवं जनरल रावत के नाती पदमेंद्र परमार,अरुण परमार आदि सैकड़ो ग्रामीण मौजूद रहे।


